Description
अर्थात सत्व, रज और तमस यह मन के तीन विशेष गुण हैं।
सुवर्ण भस्म (सुवर्णसिद्ध घृतम्) का नियमित सेवन या पुष्यनक्षत्र में सेवन करने पर रजो और तमो गुण नहीं आएंगे। नकारात्मक विचारों से बचा जा सकता है। तो मन में सकारात्मक विचार आते हैं। स्व-प्रतिरक्षित विकार (autoimmune disorder) जैसे कई रोग जैसे कि श्वेतरक्त कोशिकाएं जो शरीर को ही बचाने का काम करती हैं, जो कि शरीर का अपना प्रतिरोध है और शरीर की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। परंतु(autoimmune disorder) स्व-प्रतिरक्षित विकार में सबसे अच्छा होने पर सुवर्ण भस्म (सुवर्णसिद्ध घृतम्) का उपयोग किया जाता है। इम्युनिटी बढ़ाता है, इम्युनिटी को नियंत्रित करता है, स्व-प्रतिरक्षित विकार (autoimmune disorder) में अच्छा काम करता है। रक्त को शुद्ध करता है, शरीर के अंदर जमा हुए विषाक्त पदार्थों को निकालता है, यकृत के कार्य को सक्रिय करता है, आंतों को साफ करता है, किसी भी कैंसर कोशिकाओं के बनने पर उन्हें मारता है। टीबी के मरीज को सुवर्णसिद्ध घृतम् दें और भले ही जो लोग वह दूसरी दवा ले रहे हैं उन्हें भी सुवर्णसिद्ध घृतम् दें। सुवर्णसिद्ध घृतम् देने से टीबी के विष और कीटाणुओं का नाश होता है, शरीर के अंदर कोई बैक्टीरिया/वायरस नहीं बढ़ेगा। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति सुवर्णभस्म (सुवर्णसिद्ध घृतम्) का नियमित रूप से सेवन करता है उसे सर्प विष नहीं चढ़ता, प्रतिरक्षित शरीर (एंटी बॉडी) विकसित होता है, प्रतिभा बढ़ती है, शक्ति बढ़ती है, दीर्घायु बढ़ती है।
इस प्रकार यह घृत शरीर के खनिज तत्वों को बढ़ाने वाला और फायदेमंद होता है।
यह कोई औषधि नहीं है, यह केवल गुणों से भरपूर पोषण वर्धक है।
उपयोग: दिन में 10 से 30 ग्राम ले सकते हैं,गरम रोटी और गर्म चावल के साथ भी ले सकते हो।



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