Natural Memory Enhancers

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Natural Memory Enhancers based on Ayurvedic scripture.

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Description

श्रृतिधर

(काश्यप संहिता संहिता से)

अतो बिडालपदकं लिह्यान्मधुघृताप्लुतम्।

मेघावी शतपुष्पाया मासाच्छ्रतधरो भवेत्।।

बुद्धिमान् मनुष्य एक कर्ष (20 ग्राम) मात्रा में शतपुष्पा (शतावरी) के चूर्ण को मधु एवं घृत के साथ मिलाकर एक मास पर्याप्त सेवन करने से श्रुतधर (सुनी हुई बात को धारण करने वाला धृतिमान्) हो जाता है।

यह श्रृतिधर बननेका आसान तरीका है जो काश्यप संहिता (इति ताडपत्रपुस्तके 175 तमं पत्रम्) से उतदृत है। इसमे बताया गया है की जो व्यक्ति 20 ग्राम तक शतावरी (शतपुष्पा) के चूर्ण को यथायोग्य विषम मात्रा मे सहद एवं शुद्ध देशी गौ वंश के धी के साथ, प्रातः खाली पेट खाने से वह व्यक्ति श्रुतधर बन जाता है, सुनी हुई बाते धारण करने योग्य बनता है एवं धारणा शक्ति को प्राप्त करता है।

यह प्रयोग काश्यप संहिता के शिष्यो के लिए दिया गया था जो आज आप सबकी सेवा मे यहा बताया गया है।

अभी हमारे पास यज्ञ द्वारा अभिमंत्रित की हुई शतावरी, सहद और धी सीमीत मात्रा मे उपलब्ध है।

लाभ

व्यक्ति श्रुतधर बन जाता है, सुनी हुई बाते धारण करने योग्य बनता है एवं धारणा शक्ति को प्राप्त करता है।

सामग्री :

एक मास का कोर्षः-

शतावरी पावडर (600 ग्राम)

सहद (1000 ग्राम)

शुद्ध गीर गाय का धी – (500 मिली)

मात्रा :

20 ग्राम तक शतावरी (शतपुष्पा) के चूर्ण को यथायोग्य विषम मात्रा मे सहद एवं शुद्ध देशी गौ वंश के धी के साथ, प्रातः खाली पेट अथवा अपने वैद की सलाह के अनुसार।

Additional information

Weight2.5 kg

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