Description
संदर्भ ग्रंथ : अष्टांग हृदयम् चिकित्सा स्थान
यह घृत को लोकहित के लिए अश्विनीकुमारोने निर्मित किया है। इसका व्यवहार नस्य, स्नेहपान तथा अभ्यंग के लिए कर सकते है।
कुमकुमादि घृतम् में उपयोग की गई सामग्री: केसर, हल्दी, दारू हल्दी, छोटी पीपल, गौ घृतम्
कुमकुमादि घृतम् के फायदे : यह घृत के उपयोग से नीलिका, मुख दुषिका, शिघ्न तथा त्वचा के सर्वाधिक रोग, कफज, शिरोरोग नष्ट होते है। चेहरे की त्वचा को चमकीली एवं सुंदर बनाता है। चेहरे के काले दाग, आँखों के काले धब्बे एवं फुंसी-मुहासे को दूर करने में लाभकारी। चर्मरोग में लाभकारी है।
कुमकुमादि घृतम् के उपयोग की विधि :
- चेहरे पर हल्के हाथ से मसाज करे।
- चर्मरोग पर लगाए।
- वैद्य की सलाह अनुसार उपयोग करे।
नॉट : खाने के लिए वर्जित है।



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