Description
जात्याध घृतं में उपयोग की गयी औषधि:
गौ घृत, चमेली के पत्ते,नीम के पत्ते, पटोल पत्र, कुटकी, दारू हल्दी, हल्दी, सारिवा मूल, मंजीठ, उशीर, देशी मौम, शुद्ध तूतिया (नीला थोथा), मुलैठी, करंजवीज़
जात्याध घृतं के फायदे:
भगन्दर,मस्से, हरस, बवासीर, फिशर, गेंगरीन, शुगरवालो के पुराने घाव भरने में लाभकारी है और इससे जलन शांत होती है और दर्द में राहत मिलती है। गर्भस्थानो के दुष्ट व्रणो, नाड़ी व्रण, वेदनायुक्त व्रणमें, व्रण बंध के रूप में प्रयोग करने से श्रेष्ठ शोधन एवं रोपण का कार्य करने में लाभकारी। वर्तमान समय में एन्टीबायोटिक्स के वहु आयामी प्रचलन के उपरांत भी व्रणशोथ जैसी अवस्थाओं में अत्यंत लाभकारी है।
जात्याध घृतं के उपयोग की विधि:
हरस, भगन्दर जैसी समस्या में इंजेक्शन में भरकर दो इंच अंदर छोड़ सकते है। यह घृत को जहा घाव है वहा लगाना है।
नॉट : खाने के लिए वर्जित है।



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