Description
Dhoop Batti Stick (देशी गाय के गोबर और आयुर्वेदिक जड़ीबूटी से निर्मित)
Packaging Size: 100/500 Gram
धूपबत्ती
सामग्रीः
गुगल, चंदन, कुमकुम, अष्टगंध, जल, अगर, कर्पूर, घृत, गुड़
फायदा:
• धूप देने से मन, शरीर और घर में शांति की स्थापना होती है।
• मानसिक तनाव में इससे बहुत लाभ मिलता है।
• रोग व शोक दूर होते हैं तथा गृहकलह और आकस्मिक घटना-दुर्घटना नहीं होती है।
• घर के भीतर व्याप्त सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा भी बाहर निकलकर घर का वास्तुदोष दूर हो जाता है।
• श्राद्धपक्ष में 16 दिन ही दी जाने वाली धूप से पितृ तृप्त होकर मुक्त हो जाते हैं, तथा पितृदोष का समाधान होकर पितृयज्ञ भी पूर्ण हो जाता है।
• धूप और दीप देने की परंपरा प्राचीनकाल से ही चली आ रही है, धूप देने से मन में शांति और प्रसन्नता का विकास होता है।
Palankashadi Dhoop Samagri (पलंकषादि धूप )
Packaging Size: 100 Gram
पलंकषादि धूप का अश्विनी कुमारो द्वारा स्वर्ग को विषाणु और जीवाणु मुक्त करने के लिए उपयोग किया गया था। अग्नि और यज्ञ एक विज्ञान है, अग्नि में जो द्रव्य देते है उसे अग्नि तुरंत वायु में परिवर्तित करके प्राण वायु मजबूत करती है, इसीलिए धूप चिकित्सा और अग्नि चिकित्सा लाभकारी है। पलंकषादि मे उपयोग की गई सामग्री: शुद्ध गिर गाय का मथनी से निर्मित घृत , शुद्ध गूगल, कुष्ट, वचा, हरड, नीम की पतियां, जौ और पीली सरसों पलंकषादि के फायदे: यदि सास लेने मे दिक्कत है तो दिन मे दो बार हल्का पलंकषादि धूप लेना चाहिए। चरक संहिता में कहा गया है की इस धूप से विषाणु और जीवाणु का नाश होता है और वातावरण की शुध्धि होती है। श्वसन नलिका का सुजन कम करता है, अस्थमा(दमा) जेसी बीमारीया दूर रखने में उपयोगी है। वायरल संक्रमण, बुखार जैसी स्थितियों में लाभदायक है। पूजा और अनुष्ठानों में धूप के उपयोग से सकारात्मक ऊर्जाओं का सृजन होता है। आपके निवास स्थान को विषाणु और जीवाणु मुक्त करता सहायता करता है। बुद्धि शक्ति, स्मरण शक्ति बढाता है। पलंकषादि मे गौ घृत की मोजूदगी के कारण धूप करने पर वातावरण में oxygen की मात्रा बढाता है।
संदर्भ: चरक संहिता- देव चिकित्सा सूत्र स्थान
Palankashadi dhoop was used by the Ashwini Kumaras to purify heaven from viruses and bacteria.
“Agni” and “Hawana” are a science; the substances offered to the fire are immediately transformed by it into the air,
strengthening the life air, which is why smoke therapy and fire therapy are beneficial.
Ingredients used in Palankashadi Dhoop: pure ghee made from Gir cow’s milk using a churner, guggul, kushta, vacha, harad, neem leaves, barley, and yellow mustard.
Benefits of Palankashadi:
If one has difficulty in breathing, it is advised to use light Palankashadi dhoop twice a day.
According to the Charaka Samhita, this dhoop destroys viruses and bacteria and purifies the environment.
It reduces inflammation of the respiratory tract and is useful in preventing diseases like asthma.
It is beneficial in medical conditions like viral infections and fever.
The use of dhoop in poojas and rituals, generate positive energies.
It sanitizes your living space by making it free from viruses and bacteria.
It enhances cognitive and memory power.
Due to the presence of cow ghee in Palankashadi, burning the dhoop increases the oxygen content in the environment.
Reference: Charaka Samhita – Deva Chikitsa Sutra Sthana







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